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विश्व
प्रयोगशाला के रूप में

एक्सप्लोरर II की भावना

एक्सप्लोरर रोलेक्स को अन्वेषण के साथ हमेशा से जोड़ने वाले विशेष रिश्ते का प्रतीक है। 1920 के दशक के अंत से ही, रोलेक्स वास्तविक जीवन की परिस्थितियों में अपनी घड़ियों को सिद्ध करने के लिए विश्व को प्रयोगशाला के रूप में प्रयोग करता आया है। इसी पथप्रदर्शक भावना के कारण कंपनी ने अनेक हिमालयी अभियानों को अपनी घड़ियों से लैस किया, कठोरतम परिस्थितियों में जिनके पर्यवेक्षणों का ऑयस्टर घड़ियों के विकास पर और अधिक सटीकता, मज़बूती तथा विश्वसनीयता की खोज पर सीधा प्रभाव पड़ा।

क्योंकि यह वहां है

क्योंकि यह वहां है

एक्सप्लोरर II की भावना

पर्वतारोही जॉर्ज मैलोरी से पूछा गया:
"आप माउंट एवरेस्ट पर क्यों चढ़ते हैं?"
उन्होंने सरलता से उत्तर दिया: "क्योंकि यह वहां है"

एवरेस्ट पर विजय पाना

अभियान की घड़ियाँ

एवरेस्ट पर विजय पाना

29 मई 1953 को असाधारण निश्चय से भरे दो वयक्ति माउंट एवरेस्ट के 8,848 मीटर ऊंचे शिखर पर पहुंचने वाले पहले व्यक्ति थे। सर जॉन हंट के नेतृत्व में एक ब्रिटिश अभियान दल के सदस्य, सर एडमंड हिलेरी और तेनज़िंग नोर्गे ने वह लक्ष्य हासिल कर लिया जिसके लिए उनसे पहले दर्जनों दूसरे अभियान प्रयास करते रहे थे: दुनिया में सबसे ऊंचे स्थान पर खड़ा होना।

एड विएस्टर्स

एड विएस्टर्स

शिखर पर पहुंचना वैकल्पिक है। नीचे उतरना अनिवार्य है।

14 x 8000

एड विएस्टर्स

14 x 8000

एल्पाइन शैली

जीन त्रोयले

स्विस-कैनेडियन पर्वतारोही और नाविक जीन त्रोयले ने 1969 में पर्वत गाइड के रूप में अर्हता प्राप्त की। वे 8,000 मीटर वाले 10 शिखरों पर चढ़ाई कर चुके हैं, सभी एल्पाइन शैली में और ऑक्सीजन के बिना। वे सभी अन्वेषकों की सामान्य विशेषता, यानी दृढ़ता और लगन के मूर्त रूप है। त्रोयले अब उन अन्वेषकों का हिसाब नहीं रख पाते जिनमें उन्हें खतरे के कारण वापस लौटना पड़ा और किसी चुनौती को छोड़ देना पड़ा। वह कहते हैं, ''कम से कम 10 बार, शायद दर्जन भर।'' लेकिन हर बार वह वापस गए: पर्वत तो वहीं पर था।

तीन ध्रुव

अर्लिंग कैग्गे

32 वर्ष की उम्र से पहले, नार्वे के साहसिक यात्री अर्लिंग कैग्गे दो बार अकेले अटलांटिक के आरपार नौका में यात्रा कर चुके थे, नौका में अंटार्कटिका तक जाकर वापस आ चुके थे, बाहरी सहायता के बिना उत्तरी ध्रुव तक यात्रा करने वाले पहले दो व्यक्तियों (बोर्गे आउस्लैंड के साथ) में से एक बन चुके थे, अकेले और बिना सहायता के (पहली बार) दक्षिणी ध्रुव पहुंच चुके थे और माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई कर चुके थे।

वह ''तीन एक्सट्रीम'' – दो ध्रुवों और सबसे ऊंचे पर्वत शिखर – पर पहुंचने वाले इतिहास केपहले व्यक्ति बन गए।

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सबसे लंबा मार्च

रूने ग्येल्डनेस

नार्वे के साहसिक यात्री रूने ग्येल्डनेस 2006 में पहले और दुनिया के अकेले ऐसे व्यक्ति बन गए जो बिना सहायता के तीन विशाल बर्फीली चादरों – ग्रीनलैंड, आर्कटिक सागर और अंटार्कटिका – को पार करने में सफल रहे। नवंबर 2005 में, ग्येल्डनेस ने ''सबसे लंबा मार्च'', यानी दक्षिण ध्रुव के पार तीन माह का, 4,800 किमी लंबा अकेला स्की ट्रेक शुरू किया जिसे उन्होंने फरवरी 2006 में पूरा कर लिया। वे अब बिना पुन: आपूर्ति के सबसे लंबी स्की यात्रा और आम तौर पर सबसे लंबी स्की यात्रा के कीर्तिमानों के धारक हैं।