ब्राउज़र अपडेट आवश्यक

rolex.com पर आपका स्वागत है। आपको सर्वोत्तम संभव अनुभव प्रदान करने के लिए, rolex.com को अप-टु-डेट ब्राउज़र की आवश्यकता है। कृपया हमारी साइट को अच्छी तरह देखने के लिए किसी अधिक नए ब्राउज़र का प्रयोग करें।

QR कोड स्कैन करके WeChat पर रोलेक्स को फ़ॉलो करें

विजय अमृतराज

प्रत्येक रोलेक्स एक कहानी बयां करती है

विजय अमृतराज ने अपने पूरे जीवन में बाधाओं को पीछे छोड़ा है। उनका जन्म फेफड़ों की एक गंभीर बीमारी के साथ भारत में हुआ और उन्होंने अपने बचपन का अधिकांश समय अस्पताल में बिताया। जब डॉक्टरों ने उनके स्वास्थ्य लाभ की आशा में उन्हें कोई आउटडोर खेल खेलने की सलाह दी, तो उन्होंने टेनिस को चुना। इस खेल ने न केवल उनकी बीमारी को ठीक किया, बल्कि यह खेल उन्हें भारत के पहले पेशेवर खिलाड़ी की हैसियत से सफलता की ऊंचाइयों तक ले कर गया। 1976 में, 23 वर्ष की उम्र में, उन्होंने न्यूपोर्ट हॉल ऑफ फेम टूर्नामेंट जीता और रोलेक्स प्राप्त की। यह घड़ी, उनके जीवन में चुनौतियों और विपरीत परिस्थितियों का सामना करने और उनकी दृढ़ता की प्रतीक है। यह पिछले 40 वर्षों में कभी भी उनकी कलाई से अलग नहीं हुई, और यह आज भी उनकी सबसे अमूल्य धरोहर है।

Every Rolex Tells A Story — Vijay Amritraj

“टेनिस रैकेट और मेरे बीच में एक करीबी रिश्ता है। इसने मुझे वो सब चीज़ें दी हैं जिन्हें पाने का मैं सपना भी नहीं देख सकता था। लेकिन, किसी भी और चीज़ से ज़्यादा इसने मुझे मेरा स्वास्थ्य दिया है। ”

एक टेनिस रैकेट को पकड़ना मुझे परम आत्मविश्वास देता है। यह पूरे जीवन भर मेरा सर्वोत्तम सहारा रहा है, और इसने मुझे एक सामान्य जीवन से कहीं अधिक दिया। टेनिस रैकेट और मेरे बीच में एक करीबी रिश्ता है। इसने मुझे वो सब चीज़ें दी हैं जिन्हें पाने का मैं सपना भी नहीं देख सकता था। लेकिन, किसी भी और चीज़ से ज़्यादा इसने मुझे मेरा स्वास्थ्य दिया है। बचपन में मैं बहुत बीमार था, और मैंने अस्पताल में काफी समय बिताया। अंत में, डॉक्टरों ने मेरे परिजनों को इस आशा में मुझे कोई आउटडोर खेल खिलाने की सलाह दी कि, शारीरिक गतिविधि से मेरी अच्छी सेहत वापिस आ जाए।

भारत में, वह देश जिसकी जनसंख्या एक अरब से अधिक है, अपनी मेहनत की कमाई को एक बीमार बच्चे को पेशेवर टेनिस प्रशिक्षण दिलवाने में खर्च करना एक ऐसी चीज़ थी, जिसकी समझ अधिकांश लोगों में नहीं थी। लेकिन टेनिस ने मेरे जीवन में संपूर्ण परिवर्तन ला दिया और फिर मैं न केवल भारत का पहला पेशेवर टेनिस खिलाड़ी बना बल्कि किसी भी खेल में, पहला पेशेवर भारतीय खिलाड़ी बना। मेरा मानना है कि टेनिस मेरी सबसे महान शिक्षा थी। इसने मुझे न केवल दुनिया के बारे में सिखाया, बल्कि मेरे खुद के बारे में और एक व्यक्ति क्या हासिल करने में सक्षम है, यह भी सिखाया। टेनिस ने मुझे वो सब दिया, जिसकी मैं कल्पना भी नहीं कर सकता था, और मेरी रोलेक्स उसी का प्रतीक है। यह आपको यह सोचने पर मजबूर करती है कि असंभव कुछ भी नहीं।

“टेनिस ने मुझे वो सब दिया, जिसकी मैं कल्पना भी नहीं कर सकता था, और मेरी रोलेक्स उसी का प्रतीक है। ”

1976 में, मैंने यू.एस. में न्यूपोर्ट हाल ऑफ फ़ेम टूर्नामेंट जीता और मुझे यकीन नहीं हुआ कि इनामी राशि के साथ मुझे यह घड़ी भी पुरस्कृत की गई। उस पल के बाद से, यह मेरी कलाई से कभी नहीं उतरी। यह सुख और दुख में मेरे साथ रही है, और 40 वर्ष बाद भी यह मेरी सबसे अमूल्य धरोहर है। भारत में, आप ऐसी घड़ी तभी पहनते हैं जब आपको ऐसा लगता है कि आपने कुछ हासिल किया है। जब 23 वर्ष की उम्र में मुझे यह मिली, तो मुझे नहीं लगता था कि मेरी उम्र इतनी थी की मैं उसे अर्जित कर सकूँ। मुझे नहीं लगता था कि मैं इतना काबिल हूँ कि मैं उसे पा सकूँ, और मेरा उसे पहनना शुरू करने का बस एक ही कारण था और वो था कि मैंने उसे जीता था, और मुझे इस पर गर्व था।

मैं अपने जीवन में कई चीज़ें करने के लिए बहुत भाग्यशाली रहा हूँ, उनमें से प्रमुख है संयुक्त राष्ट्र के महासचिव कोफी अन्नान द्वारा मुझे महान बॉक्सर मुहम्मद अली, अभिनेता माइकल डगलस, नोबेल पुरस्कार विजेता एली वीज़ल और ओपेरा गायक लूसियानो पावारोत्ति के साथ, मेसेंजर ऑफ पीस यानि शांति का संदेशवाहक नियुक्त किया जाना। मैं खेल के मैदान में यह देख सकता था कि यदि आप वास्तव में किसी चीज़ पर ध्यान केन्द्रित करें, तो आप क्या बदलाव ला सकते हैं। मैंने ओलम्पिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया, मैं ओलम्पिक मशाल ले कर दौड़ा और यह भारत सरकार द्वारा एक सम्मान था। मेरा मानना है कि ये सभी चीज़ें आपको और अधिक करने के लिए प्रेरित करती हैं, ताकि आप इतने सक्षम हो सकें और देख सकें कि वास्तविक दुनिया क्या है। मैं सोचता हूँ कि यही वो कारण है जिसकी वजह से मैंने भारत में परोपकारी संस्थाओं को मदद करने के लिए अपनी फ़ाउंडेशन की शुरुआत की।

“यह मेरी कलाई से कभी नहीं उतरी। यह सुख और दुख में मेरे साथ रही है, और 40 वर्ष बाद भी यह मेरी सबसे अमूल्य धरोहर है। ”

कोई ऐसा व्यक्ति जो बुरे स्वास्थ्य के साथ बड़ा हुआ हो, उसके लिए वो पहनना जो मैंने जीती है, किसी वरदान से कम नहीं है, और मैं इसके लिए पूरे जीवन भर गर्व महसूस कर सकता हूँ। आज तक मैं खुद से पूछता हूँ, “तुम कितने अच्छे हो सकते हो? क्या तुम हर रात वापिस आ कर खुद से कह सकते हो, “मैंने आज का दिन बर्बाद नहीं किया। मैंने एक अच्छा इंसान बनने के लिए बहुत कठिन प्रयास किया — चाहे वो जो भी हो?” इसलिए मैं जब भी घड़ी की ओर देखता हूँ, मैं हमेशा सोचता हूँ, "शायद मैं इस लायक था।"